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ITR:-

ITR (इनकम टैक्स रिटर्न) इनकम टैक्स रिटर्न यानी आईटीआर एक प्रकार का फॉर्म होता है, जिसमें आपकी आय की सभी जानकारी भरी होती है। अभी 7 तरह के आईटीआर फार्म मौजूद हैं। कंपनी या फिर व्यक्ति को आईटीआर फाइल करने की एक निश्चित डेट तय होती है, लेकिन विशेष परिस्थितियों में सरकार इनकम टैक्स भरने की तारीख आगे भी बढ़ा सकती है।

What Is ITR: बेहद आसान भाषा में समझिए क्या है इनकम टैक्स रिटर्न और इसे भरने के क्या हैं फायदे..

ITR: हम अक्सर अपने घर के बड़ो के मुंह से सुनते हैं कि आईटीआर फाइल करना है कल आखिरी तारीख है। लेकिन आपने कभी सोचा है कि आखिर ये आईटीआर (What Is ITR) है क्या और इसे भरना क्यों जरूरी है और क्या हैं इसके फायदे? अगर आप भी ऐसे ही प्रश्नों के उत्तर प्राप्त करना चाहते हैं तो यह लेख आपके लिए ही है। आइए इस लेख के माध्यम से जानते हैं कि क्या है आईटीआर और समय से आईटीआर फाइल करना क्यों जरूरी है।

आईटीआर यानी इनकम टैक्स रिटर्न एक टैक्स रिटर्न फॉर्म है जिसका इस्तेमाल टैक्स देने वाले लोग इंडियन इनकम टैक्स डिपार्टमेंट को अपनी इनकम और संपत्ति की रिपोर्ट करने के लिए करते हैं। इसमें टैक्स देने वाले लोगों के पर्सनल और फाइनेंशियल डाटा से संबंधित विवरण हैं। आईटीआर ज्यादातर इलेक्ट्रॉनिक मोड में भरा जाता है लेकिन वरिष्ठ नागरिकों के लिए इसे मैन्युअल रूप से भी दाखिल करने का विकल्प मौजूद होता है।

करदाता एक व्यक्ति, आर्टिफिशियल न्यायिक व्यक्ति, फर्म, ट्रस्ट, कंपनी या एक समाज हो सकता है। इनकम टैक्स भरते समय व्यक्ति को कोई भी डॉक्यूमेंट अटैच नहीं करना पड़ता। प्रक्रिया तब पूरी होती है जब करदाता द्वारा दाखिल आईटीआर को आधार मोबाइल नंबर या इंटरनेट बैंकिंग का उपयोग करके उत्पन्न ओटीपी के माध्यम से ई-सत्यापित किया जाता है।

कौन कर सकता है फाइल?

इनकम टैक्स लॉ के अनुसार कुछ कैटेगरी बनाई गई है जिसके तहत आने वाले सभी करदाताओं को एक निहित समय के अंदर टैक्स भरना होता है।

ये टैक्स के दायरे से बाहर हैं

1- यदि कोई व्यक्ति 60 वर्षों से कम आयु का है और उसकी साल की इनकम 2.5 लाख रुपये है तो कोई टैक्स नहीं देना होगा। इससे लिमिट से अधिक वाले व्यक्ति को आईटीआर फाइल करना होगा।

2- यदि कोई व्यक्ति 60 साल से अधिक है और 80 साल से कम आयु है और सालाना इनकम 3 लाख है तो भी व्यक्ति को टैक्स के दायरे से बाहर रखा जाएगा।

3- इसके साथ ही यदि कोई व्यक्ति 80 वर्ष से अधिक का है और उसकी सालाना इनकम 5 लाख है तो उसे भी टैक्स के दायरे से बाहर रखा जाएगा।

इन लोगों को भरना होगा आईटीआर

1- यदि किसी व्यक्ति की इनकम तय लिमिट के अनुसार है लेकिन एक या अधिक चालू खाते में 1 करोड़ रुपये से अधिक की राशि या कुल राशि जमा करता है तो उसे आईटीआर के दायरे में रखा जाएगा।

2- हर कंपनी और फर्म चाहे उसे नुकसान हो या मुनाफा हो उसे आईटीआर फाइल करना ही होगा।

3- यदि कोई व्यक्ति विदेश यात्रा में 2 लाख से अधिक का खर्च करता है तो उसे भी आईटीआर के दायरे में रखा जाएगा।

4- अगर किसी व्यक्ति के बिजली की खपत पर 1 लाख रुपये से अधिक खर्च होता है तो वह भी आईटीआर भरने के लिए बाध्य है।

आईटीआर हर फाइनेंशियल ईयर में 1 अप्रैल से 31 मार्च के बीच भरा जाता है। नीचे जानिए कि आपको आईटीआर क्यों फाइल करना चाहिए?

1- पेनल्टी से बचने के लिए

यदि आप आईटीआर नहीं भरते हैं तो आप पर 5,000 रुपये जुर्माना लगाया जा सकता है। इसके साथ ही इनकम टैक्स एक्ट 1961 के अनुसार आईटीआर भरने में देर होने की स्थिति में ब्याज लगाया जा सकता है।

- कानूनी कार्रवाई

अगर आप आईटीआर फाइल करने में लेट हो जाते हैं तो आपको आईटी डिपार्टमेंट से नोटिस भेजा जाएगा और आप कानूनी मुसीबत में भी फंस सकते हैं। यदि इनकम टैक्स डिपार्टमेंट यह पाता है कि नोटिस का जवाब संतुष्ट करने वाला नहीं है तो आपके खिलाफ लीगल एक्शन भी लिया जा सकता है।

- लोन अप्रूवल

यदि आपने पहले हमेशा समय पर आईटीआर फाइल किया है तो आपको आसानी से लोन मिल सकता है।

4- वीजा

अक्सर जब आप वीजा के लिए अप्लाई करते हैं तो दूतावास आपसे आईटीआर हिस्ट्री सबमिट करने के लिए कहते हैं। यदि आपने समय पर आईटीआर भरा है तो आपको वीजा मिलने में समस्या नहीं आएगी।

अगर आपकी कुल इनकम ₹2.5 लाख तक है, तो आपको रिटर्न फाइल करने की ज़रूरत नहीं है. हालाँकि, अगर आपकी इनकम ₹2.5 लाख से ज़्यादा है, तो रिटर्न भरना अनिवार्य हो जाता है.

इनकम टैक्स रिटर्न (Income Tax Return) दाखिल करने की प्रक्रिया की शुरुआत हो चुकी है. कई लोग रिटर्न फाइल (Return File) कर चुके हैं. यदि आप भी रिटर्न फ़ाइल करना चाहते हैं तो पहले कुछ दस्तावेजों को अपने पास रख लें. ताकि बाद में परेशानी का सामना नहीं करना पड़े और आपका रिटर्न एरर फ्री फाइल हो जाए.

इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल करने के लिए किन-किन दस्तावेजों की होगी आवश्यकता

आधार और पैन कार्ड है जरूरी

आयकर रिटर्न फाइल (Income Tax Return) करने के लिए सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेजों में आधार कार्ड और पैन कार्ड है. आईटीआर में सही पैन नंबर दर्ज करना जरूरी होता है.

फॉर्म-16

ऐसे लोग जो वेतन भोगी है और आईटीआर दाखिल करना चाहते हैं उन्हें अपने पास फॉर्म 16 भी तैयार रखना चाहिए. यह कर्मचारियों को नियोक्ता की तरफ से दिया जाता है. जिसमें वित्त वर्ष के दौरान काटे गए टीडीएस का प्रमाण होता है. इसमें निवेश और आय की जानकारी होती है.

फॉर्म 16A और अन्य TDS प्रमाणपत्र

यदि आपने बैंकों में जमा किया है, एफडी या लाभांश, आवर्ती जमा से प्राप्त ब्याज की जानकारी इस फॉर्म में होती है. कंपनियों को फॉर्म 16A जारी करना होगा, जिसे भी टीडीएस प्रमाणपत्र माना जाता है. इसमें साल भर में व्यक्ति को दिए गए लाभांश और ब्याज का प्रमाण होता है.

फॉर्म-26AS भी है जरूरी

इस फॉर्म में वित्त वर्ष में आय पर काटे गए टैक्स को दर्शाया जाता है. विदेशी यात्रा, गाडी खरीदने पर एकत्र किये गए कर को इस फॉर्म में दिखाया जाता है. कैपिटल गेन

आईटीआर दाखिल करने के दौरान कैपिटल गेन को भी रिपोर्ट करना जरूरी है, इसमें भवन, भूमि, इक्विटी, म्यूचुअल फंड, घर, सोना आदि पूंजी को बेचने पर कमाया गया लाभ आता है.

ब्याज प्रमाण पत्र

कई सरकारी योजनाएं, डाकघरों में चलाई जा रही योजनाएं, सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड, आदि में निवेश करने पर मिले ब्याज को भी आईटीआर में दर्शाना जरूरी है.

वार्षिक सूचना विवरण (एआईएस)

आईटीआर दाखिल करने के दौरान एआईएस से संबंधित विवरण दाखिल करना भी जरूरी है. इसमें व्यक्ति की आय के संबंध में जानकारी होती है, जिसमें वेतन, लाभांश, और पूंजीगत लाभ भी शामिल होता है.

बचत, निवेश और खर्च का ब्योरा

जो भी करदाता पुरानी कर व्यवस्था के विकल्प का चुनाव करते हैं. उन्हें इस विकल्प का चुनाव करना होता है. इसमें छूट, निवेश और खर्च की जानकारी देनी होती है.

बैंक खाते की जानकारी

वित्त वर्ष 2023-24 के दौरान करदाताओं ने जितनी कमाई की और निवेश किया उन सभी का ब्योरा बैंक खातों की जानकारी से मिल जाता है. इसलिए आयकर रिटर्न फ़ाइल करने के दौरान अपने सभी बैंक खातों की जानकारी देनी आवश्यक है. जिसमें बैंक का नाम, अकाउंट नंबर, खाते का टाइप और आईएफएससी कोड जैसी जानकारी देनी होगी.

आईटीआर किसे फाइल करना चाहिए?

आयकर अधिनियम 1961 की धारा 139(1) के अनुसार, कोई भी व्यक्ति जिसकी आय एक वित्तीय वर्ष में आयकर छूट सीमा से अधिक है, वह आयकर रिटर्न दाखिल करने के योग्य है। इसके अलावा भारत से बाहर स्थित या भारत में कारोबार करने वाली कोई भी निजी या सार्वजनिक कंपनी, फर्म, हिंदू अविभाजित परिवार (HUFs) एसोसिएशन ऑफ पर्सन्स (AOP), बॉडी ऑफ इंडिविजुअल (BOI) आदि भी वर्ष के शुद्ध लाभ/हानि की घोषणा करने और आईटीआर दाखिल करके अपनी कर देनदारी का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी हैं।

निम्नलिखित इंडिविजुअल/HUFs को इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करने की ज़रूरत होती है:

  • एक व्यक्ति जो भारत का निवासी और सामान्य निवासी है, उसे अपना आईटीआर दाखिल करना होगा, भले ही उसकी आय निम्नलिखित स्थिति में अधिकतम छूट सीमा से अधिक न हो:
  1. वह एक लाभकारी मालिक के रूप में या अन्यथा भारत के बाहर स्थित कोई भी संपत्ति (किसी भी इकाई में किसी भी वित्तीय हित सहित) रखता है
  2. भारत से बाहर किसी अकाउंट में हस्ताक्षर करने की ऑथोरिटी रखता हो
  3. वह भारत के बाहर स्थित किसी भी संपत्ति (किसी भी इकाई में किसी भी वित्तीय हित सहित) का लाभार्थी है
  • एक व्यक्ति/एचयूएफ जिसने किसी बैंकिंग कंपनी/सहकारी बैंक में एक या एक से अधिक चालू खातों में 1 करोड़ रु या उससे अधिक राशि जमा की हो
  • एक व्यक्ति/एचयूएफ जिसने स्वयं/किसी अन्य व्यक्ति की विदेश यात्रा पर 2 लाख रु. से अधिक खर्च किया हो
  • एक व्यक्ति/एचयूएफ जो इलेक्ट्रिसीटी पर 1 लाख रु. से अधिक खर्च कर रहा हो
  • पिछले वर्ष में बिजनेस का कुल बिक्री, टर्नओवर या ग्रॉस रिसिप्ट 1 लाख रु. से अधिक हो
  • पिछले साल में प्रोफेशन का टोटल ग्रॉस रिसिप्ट 10 लाख रु. से अधिक हो
  • यदि किसी व्यक्ति का पिछले वर्ष के दौरान काटा और एकत्र किया गया कुल कर 25,000 रु. या अधिक (निवासी वरिष्ठ नागरिकों के मामले में 50,000 रुपये) हो
  • अगर किसी व्यक्ति के एक या अधिक बचत बैंक खातों में कुल जमा राशि पिछले वर्ष के दौरान 50 लाख रु. या उससे अधिक हो

ITR फ़ार्म के प्रकार

इनकम टैक्स विभाग की वेबसाइट पर बहुत से फॉर्म होते हैं जिनका उपयोग विभिन्न इनकम और टैक्स देने वालों के आधार पर ITR फाइल करने के लिए किया जाता है। असेसमेंट ईयर 2022-23 में, ITR-1 से ITR-7 तक सात फॉर्म मौज़ूद हैं। इनमें से कुछ फॉर्म अन्य फॉर्मों की अपेक्षा बड़े हो सकते हैं और उनके लिये प्रॉफिट एंड लॉस स्टेटमेंट जैसी अतिरिक्त जानकारी की जरूरत हो सकती है। इसलिए यह जानकारी प्राप्त करना ज़रूरी है कि कौन सा फार्म आपके लिए उचित होगा।

  • ITR-1: इस फ़ार्म को ‘SAHAJ’ भी कहा जाता है। यह फॉर्म एक ऐसे व्यक्ति द्वारा फाइल किया जाता है जो वेतन, पेंशन, वन हाउस प्रॉपर्टी, ब्याज या अन्य तरीकों से (लॉटरी और हॉर्स रेस से होने वाली कमाई को छोड़कर) इनकम प्राप्त करता है और जिसकी कुल इनकम 50 लाख रुपये तक है।
  • ITR-2: उन व्यक्तियों या HUF (हिंदू अविभाजित परिवारों) के लिए है जिनके पास इनकम तो है, लेकिन किसी बिज़नेस या पेशे से प्राप्त नहीं होती है।
  • ITR-3: उन अलग-अलग व्यक्तियों या HUF (हिंदू अविभाजित परिवारों) के लिए है जिनको आय किसी व्यवसाय या पेशे से प्राप्त होती है।
  • ITR-4: यह फार्म उन लोगों के लिए है जिनके पास व्यवसाय या पेशे से अनुमानित (तय नहीं) आय प्राप्त होती है।
  • ITR-5: यह फार्म व्यक्तियों, HUF (हिंदू अविभाजित परिवारों), कंपनी और फॉर्म ITR-7 फाइल करने वाले व्यक्तियों के अलावा अन्य सभी के लिए है।
  • ITR-6: यह फार्म उन सभी कंपनियों के लिए है जो इनकम टैक्स एक्ट की धारा 11 के तहत छूट का दावा नहीं कर रहे हैं।
  • ITR-7: यह फार्म उन व्यवसाय सहित उन सभी लोगों के लिए है जिन्हें धारा 139(4A), धारा 139(4B), धारा 139(4C), धारा 139(4D), धारा 139 (4E) या 139 (4F) के तहत टैक्स रिटर्न फाइल करना ज़रूरी है।

ITR फ़ार्म डाउनलोड कैसे करें?

इनकम टैक्स विभाग की ऑफिशियल वेबसाइट पर ITR फॉर्म मिल सकते हैं। फॉर्म डाउनलोड करने का तरीका नीचे दिया गया है:

  • इनकम टैक्स विभाग की वेबसाइट पर जाएं.
  • होम पेज पर, ‘Form/Downloads’ विकल्प पर क्लिक करें.
  • ड्रॉप-डाउन मेन्यू से ‘Income Tax Returns’ विकल्प चुनें.
  • एक बार जब आप ‘Income Tax Returns’ वेब पेज पर चले जाते हैं, तो वह फ़ॉर्म डाउनलोड करें जो आपकी आय और असेसमेंट ईयर के मुताबिक हो।

क्या ITR ऑनलाइन फाइल करना अनिवार्य है?

निम्नलिखित में से किसी भी टैक्सपेयर को ई-फाइलिंग के माध्यम से ही अपना ITR फाइल करना अनिवार्य है:

  • 5 लाख रुपये से अधिक आय वाले व्यक्ति या HUF (हिंदू अविभाजित परिवारों) या वो जो टैक्स रिफंड का दावा करते हैं, उन्हें ऑनलाइन ही ITR फाइल करना होगा। हालांकि, अतिवरिष्ठ नागरिक (80 या उससे अधिक उम्र के व्यक्ति) ITR 1 या 4 फाइल करने के लिए मैन्युअल या इलेक्ट्रॉनिक तरीके से ITR फाइल का विकल्प चुन सकते हैं।
  • हर कंपनी को डिजिटल सिग्नेचर कर इलेक्ट्रॉनिक रूप से ITR फाइल करना जरूरी होता है।
  • एक फर्म या व्यक्ति या HUF (हिंदू अविभाजित परिवारों) जिसका धारा 44AB के तहत ऑडिट होना है, उस को ITR ई-फाइल ही करना होता है।
  • जिस व्यक्ति ने इनकम टैक्स एक्ट, 1961 की धारा 90, 90A या 91 के तहत टैक्स छूट का दावा किया है, उसे ऑनलाइन ITR फाइल करना जरूरी है।
  • जिन टैक्स का भुगतान करने वाले भारतीयों की देश से बाहर प्रॉपर्टी है, उन्हें इलेक्ट्रॉनिक रूप से टैक्स रिटर्न जमा करना ज़रूरी है।

ITR फाइल करने के लिए ज़रूरी दस्तावेज

आयकर रिटर्न ऑनलाइन फाइल करने के लिए आवश्यक दस्तावेज नीचे दिए गए हैं:

  • पैन कार्ड
  • बैंक स्टेटमेंट
  • बैंकों या पोस्ट ऑफिस से ब्याज सर्टिफिकेट
  • टैक्स-बचत निवेशों का प्रमाण
  • फॉर्म 16 ( नौकरीपेशा व्यक्तियों के लिए)
  • सैलरी स्लिप
  • टीडीएस सर्टिफिकेट
  • फॉर्म 16A/16B/16C
  • फॉर्म 26AS

TR स्टेटस को ऑनलाइन कैसे चेक करें

अपना ITR फाइल करने के बाद आप इसका स्टेटस ट्रैक कर सकती हैं। इसके निम्नलिखित दो तरीके हैं:

एक्नॉलेजमेंट नंबर का उपयोग करके (लॉग-इन क्रेडेंशियल्स के बिना)

  • सबसे पहले इनकम टैक्स विभाग की वेबसाइट पर जाएं। ‘Services’ टैब के अंतर्गत होम पेज के बाईं ओर ‘ITR Status’ का विकल्प चुनें।
  • विकल्प चुनने के बाद, आपको एक नए वेबपेज पर रिडायरेक्ट किया जाएगा जहां आपको अपना पैन, ITR एक्नॉलेजमेंट नंबर और कैप्चा कोड आदि दर्ज करना होगा।
  • फिर जानकारी सबमिट करें और इसके बाद आपके डिवाइस की स्क्रीन पर ITR का स्टेटस डिस्प्ले किया जाएगा।

यूज़र नेम और पासवर्ड का उपयोग करके

  • ITR ई-फाइलिंग पोर्टल पर लॉग-इन करें।
  • ‘Dashbord’ पर ‘‘View Returns/Forms’’ का विकल्प चुनें।
  • ड्रॉप-डाउन मेन्यू से ITR का विकल्प और असेसमेंट ईयर चुनें और सबमिट करें।
  • सभी जानकारी सफलतापूर्वक सबमिट होने के बाद ITR स्टेटस स्क्रीन पर दिखाई देगा।

ITR फाइल करने के लाभ

पहले ITR फाइल करना मुश्किल था, लेकिन ITR ई-फाइलिंग (ऑनलाइन) शुरू होने से यह बोझ अब कम हो गया है। इनकम टैक्स रिटर्न ऑनलाइन फाइल करने से नीचे दिए गए तरीकों से मदद मिलती है:

एक बार जब आप अपने अकाउंट में लॉग इन कर लेते हैं, तो “e-File” टैब पर क्लिक करें और “Income Tax Return” विकल्प चुनें।

  • हर साल, 31 मार्च तक इनकम टैक्स रिटर्न फाइल कर लेना चाहिए। एक या दो महीने पहले अपना टैक्स रिटर्न फाइल करने से आप अपना काम जल्दी पूरा कर सकते हैं क्योंकि इससे आपको वेबसाइट के व्यस्त होने संबंधी दिक्कत का सामना भी नहीं करना पड़ेगा।
  • समय पर आयकर रिटर्न दाखिल नहीं करने पर हर दिन तब तक आपको जुर्माना भरना पड़ सकता है जब तक कि आप भुगतान नहीं कर देते हो। ऑनलाइन आयकर रिटर्न दाखिल करने से आप समय पर और कहीं से भी अपना रिटर्न दाखिल कर सकते हैं।
  • ऑनलाइन इनकम टैक्स फाइल करने से आप सही ढंग से आईटी विभाग के साथ सभी आर्थिक ट्रांजेक्शन का रिकॉर्ड रख सकते हैं। जब भी कोई व्यक्ति या संगठन किसी बैंक/ लोन संस्थान से लोन के लिए आवेदन करता है, तो आय का प्रमाण सबमिट करना ज़रूरी होता है।
  • संबंधित प्रश्न (FAQs)
  • प्रश्न. टैक्स रिटर्न फाइल करते समय मुझे कौन से दस्तावेज जमा करने होंगे?
    उत्तर: अपना आयकर रिटर्न दाखिल करते समय आपको कोई दस्तावेज जमा करने की जरूरत नहीं है। हालांकि, यदि आपको टैक्स डिपार्टमेंट से कोई नोटिस प्राप्त होता है और इन्हें टैक्स अधिकारियों को बाद में प्रदान करना होता है। इसलिए अपने फॉर्म 16, बिज़नेस बैलेंस शीट/ प्रॉफिट एंड लॉस अकाउंट स्टेटमेंट, ऑडिट रिपोर्ट, निवेश प्रमाण जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेज अपने पास रखें ।
  • प्रश्न. अगर मैंने पहले आईटीआर फाइल करते समय कोई गलती की है तो मैं अपना आईटीआर कैसे ठीक करूं?
    उत्तर: अगर आपने टैक्स रिटर्न फाइल करते समय कोई गलती की है तो आप रिवाइज़्ड रिटर्न फाइल करके अपनी गलती सुधार सकती हैं। रिवाइज़्ड रिटर्न फाइल करते समय आपको किसी पेनल्टी का भुगतान नहीं करना होता है, लेकिन इसका ख्याल ज़रूर रखें कि असेसमेंट ऑफिसर द्वारा असेसमेंट पूरा करने से पहले या लागू असेसमेंट ईयर के खत्म होने तक (जो भी पहले हो) आप अपना रिवाइज़्ड रिटर्न फाइल कर लें। वित्त वर्ष 2020-21 के लिए रिवाइज़्ड रिटर्न फाइल करने की अंतिम तिथि 31 मार्च, 2022 तक बढ़ा दी गई है।
  • प्रश्न. अगर मैं समय पर अपना आयकर रिटर्न फाइल नहीं कर पाती हूं तो क्या होगा?
    उत्तर: यदि आपने समय पर इनकम टैक्स रिटर्न फाइल नहीं किया है, तो आप असेसमेंट ईयर के खत्म होने तक लेट रिटर्न दाखिल कर सकती हैं। असेसमेंट ईयर 2021-22 के लिए, आपकी वार्षिक आय और आप कितनी देर से अपना टैक्स रिटर्न फाइल कर रहे हैं, के आधार पर आपको अलग- अलग फीस का भुगतान करना पड़ सकता है। यदि आपकी टैक्स योग्य आय 5 लाख रु. या उससे अधिक है तो कोई भी व्यक्ति जो तय तारीख के बाद आईटीआर फाइल करता है, उसे 5,000 रुपये की लेट फीस का भुगतान करना होगा और यदि कर योग्य आय 5,00,000 रुपये से कम है तो जुर्माना 1,000 रुपये है।
  • प्रश्न. मेरे पास पैन कार्ड नहीं है। क्या मैं अपना आयकर रिटर्न फाइल कर सकती हूँ?
    उत्तर: हां, अगर आपके पास पैन कार्ड नहीं है तो आप आधार का उपयोग करके अपना आयकर रिटर्न फाइल कर सकती हैं।

ABOUT TDS

कई तरह की कमाई के स्रोत पर लगाया जा सकने वाला टैक्स TDS है| यह टैक्स चोरी को रोकने में मदद करता है और टैक्स को वित्तीय वर्ष के अंत में इकट्ठा टैक्स भुगतान करने के बोझ से भी राहत दिलाता है। इसलिए TDS के द्वारा सरकार एक तरफ साल भर राजस्व की लगातार आमदनी को सुनिश्चित करती है और टैक्स देने वाले के लिए वर्ष के अंत में वित्तीय तनाव को भी कम करती है।

TDS टैक्स कटौती के बारे में जानें-  

आयकर अधिनियम, 1961 के अनुसार, TDS में कटौती से संबंधित पॉलिसी और नियमों का प्रबंधन CBDT (केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड) द्वारा किया जाता है। TDS पर काटे गए टैक्स भारतीय राजस्व सेवा विभाग (IRS) का हिस्सा है। TDS को काटने के लिए जिम्मेदार व्यक्ति को डिडक्टर( टैक्स काटने वाला) कहा जाता है और जिस व्यक्ति के खाते से कटौती होती है, उसे डिडक्टी(टैक्स देने वाला) कहा जाता है।

TDS नियम के अनुसार, वेतन का भुगतान करते के समय (यदि आय पहले से तय सीमा से अधिक है) टैक्स काटने वाले को TDS काटना चाहिए और टैक्स देने वाले व्यक्ति के ओर से सरकार को ये टैक्स देना चाहिए। तय समय सीमा में TDS का भुगतान करना, टैक्स काटने वाले का कर्तव्य है। रिटर्न फाइल करने के बाद टैक्स काटने वाले को सरकार द्वारा TDS कटौती का प्रमाण पत्र जारी करवाना होता है।

TDS के प्रकार

निम्नलिखित प्रकार हैं-

  •  
    • वेतन – कंपंनी द्वारा कर्मचारी को भुगतान.
    • सिक्योरिटी पर ब्याज.
    • डिविडेन्ट पर.
    • शेयर के ब्याज़ पर.
    • खेलों में जीती गई रकम जैसे- पज्जल, कार्ड, लॉटरी, आदि।
    • ठेकेदार के भुगतान
    • बीमा बेचने से कमीशन पर
    • ब्रोकरेज या कमीशन
    • अचल संपत्ति का ट्रांसफर
    • अचल संपत्ति प्राप्त करने पर मुआवजा
    • किराए का भुगतान
    • कमीशन भुगतान
    • बैंक ब्याज़
    • कंपनी के डायरेक्टर को दिया जाने वाले भुगतान आदि ।

TDS में कटौती करने से पहले ध्यान रखने योग्य बातें –

  • आयकर अधिनियम की धारा 192 से 194L को TDS के तहत खर्चों और आय के स्रोतों(sources) की पूरी लिस्ट दी जाएं ।
  • यदि कोई व्यक्ति इनकम टैक्स के दायरे में नहीं आता तो TDS कटौती न कराने के लिए एडवांस में टैक्स काटने वाले को फॉर्म 15G या फॉर्म 15H दे सकता हैं.।
  • फॉर्म 15H वरिष्ठ नागरिकों के लिए हैं.
  • फॉर्म 15G अन्य सभी व्यक्तियों के लिए हैं.
  • जैसा कि ऊपर लिखा गया है कुछ भुगतान TDS के अधीन हैं.
  • TDS के लिए एक तय सीमा हैं और यह हर तरह की आय पर लागू होता हैं.
  • नौकरीपेशा व्यक्तियों के लिए आयकर स्लैब रेट के अनुसार TDS की कटौती की जाती हैं.
  • अन्य टैक्स देने वाले के लिए, TDS हर तरह की आय पर तय प्रतिशत में काट लिया जाता हैं.

TDS निम्नलिखित मामलों में TDS लागू नहीं होता:

  •  
    •  
      • जब राशि का भुगतान सरकार या किसी सरकारी बॉडी और भारतीय रिजर्व बैंक को किया जाता हैं.
      • धारा 10(23D) के तहत अधिसूचित म्यूचुअल फंड के लिए राशि का भुगतान किया जाता हैं.
      • जब आयकर अधिनियम की धारा 192 के तहत करदाता के पास टैक्स छूट का प्रमाण पत्र हो.
      • जब राशि का भुगतान राज्य या केंद्रीय वित्तीय निगमों को किया जाता हैं.
      • ब्याज जमा किया जा चुका हो.
      • बैंक या बैंकिंग कंपनी.
      • जीवन बीमा निगम, यूनिट ट्रस्ट ऑफ इंडिया या किसी अन्य बीमा कंपनी.
      • राष्ट्रीय बचत प्रमाणपत्र.
      • किसान विकास पत्र.
      • गैर निवासी (non-resident) बाहरी खाता.
      • बैंकिंग सहकारी समिति.
      • बैंकों और सहकारी समिति के सेविंग अकांउट और रेकरिंग डिपॉज़िट.
      • टैक्स की कटौती न करने के लिए अधिसूचित निकाय(नॉटिफाइड बॉडी)।
  •  
    • यह टैक्स चोरी रोकने में मदद करता हैं।
    • पूरे वित्तीय वर्ष में TDS कटता है और यह राजस्व की आमदनी का तरीका हैं।
    • यह टैक्स कलेक्शन का तरीका हैं।
    • यह सरकार और टैक्स काटने वाले के बीच टैक्स कलेक्शन की जिम्मेदारी साझा करने का एक तरीका है।

आयकर अधिनियम की धारा 203 के अनुसार, जो कोई भी TDS काट रहा हैं, उसे अन्य सभी जानकारी के साथ टैक्स के रूप में काटी गई राशि से संबंधित प्रमाण-पत्र उसे दिखाना होता है जिसका TDS काटा जा रहा है| इसे TDS प्रमाण-पत्र कहा जाता हैं।

नौकरीपेशा के मामले में

  • कंपंनी अपने कर्मचारी को फार्म 16 देती हैं जिसमें टैक्स राशि से संबंधित सभी जानकारी होती हैं।
  • फॉर्म में सभी जानकारियां होती हैं जैसे कम्प्यूटेशन, कटौती और टैक्स का भुगतान आदि।
  • फॉर्म अगले वित्तीय वर्ष के 31 मई तक देना होता हैं।

गैर-नौकरीपेशा के मामलों में

  • फॉर्म 16A टैक्स काटने वाले के द्वारा दिया जाता है जिसमें टैक्स कम्प्यूटेशन, टैक्स छूट और भुगतान से संबंधित सभी जानकारी होती हैं।
  • TDS रिटर्न फाइल करने की तय तारीख के 15 दिनों में कटौती करने वालों को प्रमाण-पत्र जारी करना होता हैं।

TCS: एक प्रमाण पत्र है जिसमें टैक्स छूट और टैक्स भुगतान से संबंधित जानकारी होती है जो फॉर्म 27D में जारी किया गया है|

द्र सरकार को TDS जमा करना

  •  
    • TDS काटने वाले को NSDL के द्वारा भुगतान करके केंद्र सरकार को TDS जमा करना होता हैं, जिसे ऑथॉराइज़ड बैंक शाखाओं में जमा किया जा सकता हैं।
    • यह भुगतान NSDL के आधिकारिक पोर्टल के द्वारा चालान 281 का उपयोग करके और नेट बैंकिंग के माध्यम से भुगतान ऑनलाइन किया जा सकता है।
    • TDS रिटर्न फाइल करने से पहले TDS राशि जमा करनी होती हैं।
    • ई-भुगतान उन सभी के लिए अनिवार्य है जो धारा 44AB के तहत ऑडिट हो सकता है|

DS की कटौती न करने पर:

यदि कोई TDS काटने वाला टैक्स नहीं काटता हैं तो इसके लिए आयकर अधिकारी द्वारा टैक्स काटने वाले को दिया जाने वाला लाभ नहीं मिलता हैं।

देरी से TDS काटने पर:

भुगतान या खरीद के एक दिन या कुछ दिन बाद TDS काटने पर 1% प्रति माह का ब्याज़ देना होता है|

TDS को देरी से भुगतान करने पर:-

ऐसी स्थिति में टैक्स काटने वाले को हर महीने 1.5% की रेट से TDS राशि पर ब्याज़ का भुगतान करना होगा।

TDS काटने वाले को हर तीन महीनों में तय तिथि पर TDS रिटर्न फाइल करना होता है| विभिन्न तरह के TDS कटौती के लिए अलग-अलग TDS फॉर्म होते हैं|

TDS फाइल करने के फॉर्म-

फार्म  

TDS कटौती के उद्देश्य 

फ़ार्म  24Q

वेतन  के लिए  TDS

फार्म 26Q

वेतन के अलावा  अन्य  भुगतान के लिए

फार्म 27 Q

अप्रवासी भारतीयों के ब्याज व अन्य  भुगतान  पर TDS

फार्म 27EQ

TCS की तिमाही स्टेटमेंट के लिए

TDS रिटर्न ऑफलाइन और ऑनलाइन दोनों तरह से फाइल किया जा सकता है| हालाँकि, आईटी अधिनियम की धारा 206 के अनुसार, निम्नलिखित के लिए इलेक्ट्रॉनिक तरीके से TDS रिटर्न फाइल करना अनिवार्य है:

  • सभी निजी कंपनियों के लिए
  • सभीसरकारी विभगों के लिए
  • अगर टैक्स काटने वाले का धारा 44AB के तहत ऑडिट हो सकता है
  • यदि टैक्स काटने वाले के तिमाही (तीन महीनें) की स्टेटमेंट में ये रिकॉर्ड आता है कि उसने इस दौरान 20 या ज़्यादा लोगों का TDS काटा है|

ई-फाइलिंग TDS रिटर्न के लिए कुछ पूर्व-आवश्यकताएं

  •  
    • टैक्स काटने वाला ई-फाइलिंग में रजिस्टर्ड होना चाहिए और उसके पास वैध TAN भी होना चाहिए।
    • रिफंड तैयारी उपयोगिता (RPU) और फ़ाइल मान्यता उपयोगिता (FVU) NSDL वेबसाइट (https://www.tin-nsdl.com/ ) से डाउनलोड करें।
    • इसको ध्यान में रखते हुए TDS का स्टेटमेंट तैयार किया जाना चाहिए।
    • ई-फाइलिंग साइट में वैध DSC के लिए रजिस्टर करें।

 

ई-फाइलिंग TDS रिटर्न की प्रक्रिया

  • ई-फाइलिंग के मुख्य पेज पर जाएँ।
  • रजिस्ट्रेशन के समय दी गई यूजर आईडी और पासवर्ड के द्वारा लॉग-इन करें।
  • TDS सेक्शन पर जाएँ और ‘upload TCS’ विकल्प चुनें।
  • सभी जानकारी का सही से चुनें और भरें और ‘confirm’करें।
  • TDS/TCS अपलोड करें (NSDL वेबसाइट से डाउनलोड की गई जानकारी द्वारा तैयार करें)।
  • ई-फाइलिंग के लिए टैक्स काटने वाले को डिजिटल सिग्नेचर करने होते हैं| DSC का उपयोग करके डिजिटल सिग्नेचर की फ़ाइल जनरेट करें और उसे  जमा करें।
  • अपलोड बटन पर क्लिक करें और आपको कन्फरमेशन का मैसेज प्राप्त होगा।

महत्वपूर्ण बिंदू:

  • आयकर अधिनियम की धारा 203 A के अनुसार TDS काटने वाले प्रत्येक व्यक्ति के पास TAN(कर कटौती और वसूली खाता संख्या) होना चाहिए।
  • TDS रिटर्न दाखिल करते समय TAN एक अनिवार्य आवश्यकता है और जारी किए गए TDS प्रमाण पत्र पर भी लिखा जाना चाहिए।
  • TDS कटौती आपके पैन से जुड़ी हुई हैं। TDS काटने के लिए पैन जानकारी होना आवश्यक है।
  • टैक्स काटने वाले को हर टैक्स देने वाले के पैन से लिंक करें।
  • कुल भुगतान टैक्स के लिए टैक्स काटने वाले को भुगतान किए गए TDS का प्रमाणपत्र प्रस्तुत करना होगा।
  • TDS जानकारी टैक्स को क्रेडिट फार्म 26AS द्वारा जांच सकते हैं।
  • यह टैक्स जानकारी आपको टैक्स देने वाले के द्वारा सभी भुगतानों के लिए काटे गए TDS की जानकारी देता हैं।
  • देर से फाइलिंग ITR के लिए।

यदि टैक्स काटने वाले तय तिथि पर या उससे पहले TDS रिटर्न नहीं दे पाता हैं, तो वह डिफ़ॉल्ट की तिथि तक प्रतिदिन 200 रु. का जुर्माना देने के लिए जिम्मेदार होगा। और इस तरह का जर्माना कुल राशि व कटौती टैक्स की कुल राशि से अधिक नहीं होना चाहिए।

  • ITR फाइल नहीं करने पर।
  • यदि टैक्स काटने वाला TDS रिटर्न की तय तिथि के एक वर्ष में TDS रिटर्न फाइल नहीं करता है तो उसे 10000 रु. से 1 लाख रुपये तक का जर्माना भरना पड़ सकता हैं।
  • यह उन मामलों के लिए लागू होता है जिनमें टैक्स काटने वाले के द्वारा गलत जानकारी दी गई हो।
  • TDS वापस कर दिया जाता है।
  • यदि काटे गए TDS आपको एक वर्ष में भुगतान करने वाले टैक्स की कुल राशि से अधिक है, तो आप TDS राशि के लिए दावा करने के योग्य हैं।
  • जब आपकी कुल आय टैक्स के दायरे में नहीं आती है, तो आप रिफंड के लिए दावा कर सकते हैं।

उदाहरण के लिए, आप एक फ्रीलांसर हैं जो विभिन्न कंपनियों के साथ कॉन्टरेक्ट पर काम करते हैं। मान लीजिए कि आपके द्वारा किए गए एक काम के लिए 10,000 रु. का TDS काटा गया। लेकिन, उस वर्ष में आपकी कुल आय 1.8 लाख रुपये तक थी जो टैक्स छूट सीमा में है। ऐसी स्थिति में रिफंड का दावा कर सकते हैं क्योंकि आपकी वार्षिक आय टैक्स के दायरे से बाहर है।

अगर आपकी आय टैक्स के दायरे से बाहर आती है, तो आप स्रोत पर टैक्स की कटौती न करने के लिए एक रिक्वेस्ट कर सकते हैं। इसके लिए निम्न दो तरीके हैं-

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    • फॉर्म 15G/15H जमा करें। जिसके द्वारा आप घोषणा कर सकते हैं कि आपकी वार्षिक आय संबंधित वित्तीय वर्ष में टैक्स के दायरे से बाहर है इसलिए स्रोत पर कर नहीं काटा जाना चाहिए।
  •  
    • घोषणा केवल उस विशेष वित्तीय वर्ष के लिए अच्छा रखती है। इसलिए, इसे हर साल जमा करने की आवश्यकता होती है जिसमें आपकी टैक्स योग्य आय सीमा से कम है।
    • आप TDS की कम कटौती या न के बराबर कटौती के लिए एक आवेदन पत्र रख सकते हैं।
    • भरे गए फॉर्म 13 को आयकर अधिकारी को जमा करना होगा।

TDS रिफंड प्रक्रिया

आयकर साइट के माध्यम से TDS रिफंड का दावा किया जा सकता है। आपको आयकर रिटर्न फाइल करना होगा और TDS रिफंड दिखाना होगा। आयकर रिटर्न दाखिल करने के बाद आयकर विभाग TDS रिफंड अनुरोध पर कार्रवाई करेगा। यह राशि 6 महीने के भीतर आपके खाते में जमा हो सकती है। TDS रिटर्न का स्टेटस/स्तिथि आप ऑनलाइन देख सकते हैं।

ITR फाइल करने के लिए जरूरी दस्तावेज

अगर आप इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने जा रहे हैं तो इसके लिए कुछ डॉक्युमेंट जरूरी हैं। ये जरूरी डॉक्युमेंट पैन कार्ड, आधार कार्ड, बैंक अकाउंट डिटेल हैं। अकाउंट डिटेल में आपको बैंक का नाम, अकाउंट नंबर, अकाउंट का प्रकार और आईएफएससी कोड देना होगा। इसके अलावा, आपको कंपनी की ओर से दिए जाने वाले फॉर्म 16 की भी जरूरत पड़ेगी। इसमें कर्मचारी की सैलरी और टैक्स कटौती की डिटेल होती है। आपको फॉर्म 26AS की भी जरूरत पड़ सकती है। इस फॉर्म के जरिए आय पर लगे टैक्स की पूरी डिटेल जान सकते हैं। इसे आयकर विभाग की वेबसाइट से डाउनलोड कर सकते हैं। आप चाहें तो फॉर्म 16 और फॉर्म 26AS के टैक्स डिडक्शन की डिटेल का मिलान कर सकते हैं।

इसी तरह, आपको आईटीआर फाइल के वक्त निवेश से जुड़े डॉक्युमेंट की जरूरत पड़ती है। इसमें एलआईसी प्रीमियम की रसीद के अलावा पीपीएफ-सुकन्या जैसी टैक्स सेविंग स्कीम्स में निवेश की डिटेल शामिल हैं। इसके जरिए आप टैक्स छूट का क्लेम कर सकते हैं। वहीं, आपको इनकम के प्रूफ भी रखने की जरूरत पड़ेगी। फिक्स्ड डिपॉजिट या किसी अन्य स्कीम से इंटरेस्ट मिल रहा हो तो उसका डॉक्युमेंट रहना चाहिए। होम लोन के री-पेमेंट हो या कहीं दान किया हो तो इससे जुड़े डॉक्युमेंट की भी जरूरत पड़ेगी। इसकी मदद से भी टैक्स सेविंग कर सकते हैं। शेयर या म्यूचुअल फंड्स से कमाई की गई है तो उसके डॉक्युमेंट भी देने पड़ेंगे।

अगर कोई कारोबारी आईटीआर फाइल करने जा रहा है तो उसे कंपनी से जुड़े डॉक्युमेंट की जरूरत पड़ेगी। आपको बता दें कि आईटीआर फाइल करने के लिए पैन और आधार का लिंक होना जरूरी है। अगर दोनों डॉक्युमेंट की लिंकिंग नहीं है तो आप आईटीआर फाइल नहीं कर सकते हैं।

ई-वेरिफाई

इनकम टैक्स रिटर्न फाइलिंग का आखिरी स्टेप ई-वेरिफिकेशन होता है। अगर इससे चूक गए तो रिटर्न फाइलिंग की आपकी सारी मेहनत बेकार हो सकती है। हालांकि, आयकर विभाग की ओर से ITR ई-वेरिफिकेशन के लिए कुछ समय भी दिया जाता है। आप इस अवधि में 6 तरीकों में से किसी एक के जरिए ई-वेरिफिकेशन कर सकते हैं। आयकर विभाग की वेबसाइट पर दी जानकारी के मुताबिक आधार के साथ रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर ओटीपी के जरिए ई-वेरिफिकेशन कर सकते हैं। इसी तरह, आपके बैंक अकाउंट या डीमैट खाते के माध्यम से इलेक्ट्रॉनिक वेरिफिकेशन कोड जनरेट कर ई-वेरिफिकेशन किया जा सकता है। ई-वेरिफिकेशन के तरीके में नेट बैंकिंग या डिजिटल हस्ताक्षर प्रमाणपत्र भी शामिल है। वहीं, ऑफलाइन तरीके में एटीएम के जरिए इलेक्ट्रॉनिक वेरिफिकेशन कोड जनरेट कर भी इस प्रक्रिया को पूरा कर सकते हैं।

वहीं, आईटीआर स्टेटस देखने के लिए आपको www.incometax.gov.in की वेबसाइट पर विजिट करना होगा। यहां अपने पैन कार्ड की डिटेल डालकर लॉगिन करें। अगले स्टेप में ई-फाइल ऑप्‍शन आएगा, जिसे क्लिक करने के बाद व्‍यू फाइल्‍ड रिटर्न पर विजिट करें। यहां आपको अपने आईटीआर का स्‍टेटस दिखाई देखा। यहां आप पता कर सकते हैं कि आईटीआर फाइल हुआ है या नहीं। अगर नहीं हुआ है तो इसकी वजह क्या है, इसकी जानकारी भी आपको मिल जाएगी। कई बार ई-वेरिफिकेशन नहीं होने की वजह से आईटीआर फाइलिंग की प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाती है। वहीं, आप अपने आईटीआर के रिफंड स्‍टेटस को भी देख सकते हैं। इसके लिए व्‍यू डिटेल्‍स पर क्लिक करना होगा।

ITR फाइल करते वक्त इन गलतियों से बचें

अगर आप टैक्स के दायरे में आते हैं तो आपके लिए इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) दाखिल करना, बेहद जरूरी होता है। ITR दाखिल करते वक्त कई बार हम अनजाने में कई गलतियां कर जाते हैं, जिसके कारण आपका आईटीआर रिजेक्ट हो जाता है या आयकर नोटिस का सामना करना पड़ता या फिर रिफंड में देरी हो जाती है। आइए इन गलतियों को विस्तार से जानने की कोशिश करते हैं। सीए अजय बगड़िया बताते हैं कि सामान्य तौर पर होने वाली गलतियों में से अधिकांश गलतियां Tax Provisions की गलत व्याख्या या अज्ञानता के कारण हैं।

  • गलती नंबर 1टैक्स डिडक्शन का क्रेडिट नहीं लेना भी एक सामान्य गलती है। कई बार हमें उम्मीद से कम रिफंड मिलता है। कभी-कभी हमें Refund due के बजाय डिमांड नोटिस मिलते हैं और इसका सामान्य कारण टीडीएस कटौती के लिए देय क्रेडिट नहीं मिल रहा है। सबसे आम गलती उपयोगकर्ता करते हैं कि वे आय के उचित हेड के तहत कर कटौती का क्रेडिट नहीं लेते हैं।
  • गलती नंबर 2आईटीआर रिफंड में देरी का तीसरा सबसे आम कारण बैंक खाते के सत्यापन में समस्या है। पैन और आधार को लिंक करना सुनिश्चित करें। यह तेजी से रिफंड के लिए बैंक सत्यापन और faster Refunds के लिए ई-सत्यापन में मदद करता है।
  • गलती नंबर 3आईटीआर फॉर्म का चयन करने में आम गलती है। उदाहरण के लिए, अगर किसी के पास एक से अधिक गृह संपत्ति है, तो कोई ITR-1 दाखिल नहीं कर सकता है। इसलिए, सही आईटीआर फॉर्म का पता लगाने और उसे दाखिल करने की जरूरत है।
  • गलती नंबर 4वेतनभोगी व्यक्तियों के मन में बड़ी गलतफहमी है कि टैक्स को फॉर्म 16 से आगे नहीं बचाया जा सकता है। वे टैक्स कटौती पर नए सिरे से नज़र डाले बिना फॉर्म 16 की टैक्स गणना पर भरोसा करके आईटीआर फाइल करते हैं। हमें इस गलती से बचना चाहिए।

इनकम टैक्स रिफंड

आपका नियोक्ता (जहां आप नौकरी करते हैं) या कोई और टीडीएस (TDS) के रूप में आपका कुछ पैसा काट चुका है और अगर आपकी इनकम कर योग्य नहीं है तो आप इस रकम को पाने के हकदार हैं। इसके लिए आप आईटीआर दाखिल करके रिफंड का दावा कर सकते हैं।

रिफंड टैक्सपेयर्स के खाते में सीधे क्रेडिट किया जाता है। इसके अलावा, चेक या डिमांड ड्राफ्ट के जरिए रिफंड टैक्सपेयर्स के पते पर भेज दिया जाता है। यह इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने के बाद ही मिलता है। टैक्स रिफंड विभिन्न स्थितियों से हो सकता है, लेकिन आमतौर पर ऐसा तब होता है जब आप साल के दौरान वास्तव में देय राशि से अधिक कर का भुगतान करते हैं । जैसे अगर आप किसी सर्विस या काम के बदले कमीशन पाते हैं और उस पर टीडीएस कटता है तो आप रिफंड ले सकते हैं। कंपनियां अपने कर्मचारियों की सैलरी से हर महीने कुछ पैसा टैक्स के रूप में काटती हैं और इसे विभाग में जमा करती हैं। आईटीआर दाखिल करते समय इनकम टैक्स रिबेट्स आदि लेने के बाद अगर आपकी सालाना इनकम 5 लाख से कम है तो वह कटा हुआ पैसा रिफंड के रूप में पा सकते हैं।

इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की नई व्यवस्था के अनुसार, अब कोई भी टैक्सपेयर रिटर्न भरने के 10 दिनों के बाद रिफंड का स्टेटस चेक कर सकता है। अब ज्यादातर टैक्सपेयर्स को आईटीआर भरने के 2 सप्ताह के अंदर रिफंड का पैसा मिलने लगा है।

ITR फाइल करने के फायदे

अगर आप इनकम टैक्स के दायरे में नहीं भी आते हैं तब भी आपको रिटर्न फाइल करना चाहिए। अगर आप ITR फाइल करते हैं, तो इससे आपको वीजा, बड़े अमाउंट का बीमा लेने, लोन, होम लोन जैसी कई चीजों में सहूलियत मिलती है।

आईटीआर (इनकम टैक्स रिटर्न) के फायदों की बात करें तो आपको टैक्स रिफंड क्लेम करने के लिए ITR दाखिल करना जरूरी है। अगर आपका टीडीएस (TDS) कटता है और आपकी इनकम टैक्सेबल नहीं है तो आप आईटीआर दाखिल कर रिफंड ले सकते हैं।

इसका दूसरा सबसे बड़ा फायदा वीजा लेने में है क्योंकि कई देशों की वीजा अथॉरिटीज, वीजा देने के लिए 3 से 5 साल का ITR मांगते हैं। ITR से आपके फाइनेंशियल स्टेटस का पता चलता है। वहीं, ITR फाइल करने पर एक प्रमाण पत्र मिलता है। आय का रजिस्टर्ड प्रमाण मिलने से क्रेडिट कार्ड, लोन या खुद की क्रेडिट साबित करने में मदद होती है। यह आपकी इनकम का प्रूफ होता है। इसे सभी सरकारी और प्राइवेट संस्‍थान इनकम प्रूफ के तौर पर स्‍वीकार करते हैं।

ITR रसीद आपके पंजीकृत पते पर भेजी जाती है, जो एड्रेस प्रूफ के रूप में काम कर सकती है। अगर आप खुद का बिजनेस शुरू करना चाहते हैं तो ITR भरना बहुत जरूरी है। सरकारी विभाग में कॉन्ट्रैक्ट लेने के लिए भी पिछले 5 साल का ITR देना पड़ता है। अगर आप 1 करोड़ रुपए का टर्म प्लान लेना चाहते हैं तो बीमा कंपनियां आपसे ITR मांग सकती हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मेरी इनकम 2.50 लाख से कम है, क्या मुझे आईटीआर फाइल करना चाहिए?

सीए अजय बगड़िया कहते हैं कि 2.50 लाख से कम आय वाले लोगों को आईटीआर भरने की जरूरत नहीं है। अगर आपकी कुल आमदनी सिर्फ कृषि और उससे जुड़े कार्य से होती है तो आपको आईटीआर भरने की जरूरत नहीं है। वैसे अगर आप नौकरी या कारोबार करते हैं और आपकी कुल सालाना आमदनी 2.5 लाख रुपये से कम है तब भी आप आईटीआर भर सकते हैं।

ITR (इनकम टैक्स रिटर्न)

इनकम टैक्स रिटर्न यानी आईटीआर एक प्रकार का फॉर्म होता है, जिसमें आपकी आय की सभी जानकारी भरी होती है। अभी 7 तरह के आईटीआर फार्म मौजूद हैं। कंपनी या फिर व्यक्ति को आईटीआर फाइल करने की एक निश्चित डेट तय होती है, लेकिन विशेष परिस्थितियों में सरकार इनकम टैक्स भरने की तारीख आगे भी बढ़ा सकती है।

ITR क्या है

भारत सरकार के इनकम टैक्स डिपार्टमेंट (Income Tax Department) को जमा किए जाने वाले फॉर्म को इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) कहते हैं। इस फॉर्म में जमा करने वाले व्यक्ति की इनकम और उस पर लगने वाले टैक्स की जानकारी होती है। इनकम टैक्स रिटर्न फॉर्म के जरिए एक व्यक्ति किसी वित्त वर्ष (1 अप्रैल से 31 मार्च तक) के दौरान अपनी कमाई और टैक्स का ब्योरा देता है।

इनकम का यहां क्या है अर्थ?

  • सैलरी के जरिए हुई कमाई
  • किसी बिजनेस या प्रोफेशन के जरिए की गई इनकम
  • हाउस प्रॉपर्टी के जरिए इनकम
  • कैपिटल गेन्स के जरिए की कमाई
  • लॉटरी, रॉयल्टी इनकम, डिविडेंड, डिपॉजिट पर ब्याज आदि से की गई कमाई इसके दायरे में है

कितने प्रकार के ITR फॉर्म होते हैं?

इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के अनुसार 7 प्रकार के आईटीआर फॉर्म होते हैं। ITR-1, ITR-2, ITR-3, ITR-4, ITR-5, ITR-6, ITR-7। किसी व्यक्ति को कौन सा फॉर्म भरना होगा यह इनकम और उसके नेचर पर निर्भर करेगा।

 

सबसे बड़ा इनकम प्रूफ है ITR

 

इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करने पर टैक्सपेयर्स को एक सर्टिफिकेट मिलता है. ये एक सरकारी प्रमाण होता है. इससे व्यक्ति की सैलरी यानि सालना इनकम का पता चलता है. इनकम का रजिस्टर्ड प्रूफ मिलने से क्रेडिट कार्ड, लोन लेना आसान हो जाता है. साथ ही खुद की क्रेडिट हिस्ट्री साबित करने में भी मदद मिलती है.

Visa के लिए जरूरी है Tax रिटर्न

विदेश ट्रैवल करने से पहले वीजा (Visa) की जरूरत होती है. वीजा अप्लाई करते वक्त इनकम टैक्स रिटर्न मांगा जाता है. वीजा अथॉरिटीज आमतौर पर 3 से 5 साल का ITR मांगती हैं. ITR के जरिए ये चेक किया जाता है कि जो व्यक्ति उनके देश में आ रहा है या आना चाहता है उसका फाइनेंशियल स्टेटस क्‍या है. इसलिए ITR जरूर भरें.

रिटर्न एड्रेस प्रूफ भी है

आजकल इनकम टैक्स रिटर्न ऑनलाइन भरने का जमाना है. लेकिन, मैनुअली भरने पर इनकम टैक्स रिटर्न की रसीद रजिस्टर्ड एड्रेस पर भेजी जाती है. इससे यह एड्रेस के तौर पर भी स्वीकार की जाती है. ITR इनकम के साथ एड्रेस प्रूफ बन जाता है.

ज्यादा इंश्योरेंस कवर चाहिए तो भरें रिटर्न

इंश्योरेंस कवर ज्यादा रखने की शर्त या फिर 1 करोड़ रुपए तक के टर्म प्लान पर इंश्योरेंस कंपनियां इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) देखती हैं. इनकम का सोर्स और चुकाने की स्थिति को जांचने के लिए ITR मांगा जाता है. 

ITR से स्टॉक या म्यूचुअल फंड के घाटे को एडजस्ट करें

स्टॉक मार्केट में शेयरों की ट्रेडिंग या म्यूचुअल फंड में निवेश करने के लिए भी ITR अच्छा रिसोर्स है. कहीं भी घाटा होने की स्थिति में घाटे को अगले साल कैरी फारवर्ड किया जा सकता है. लेकिन, इसके लिए तय डेडलाइन में इनकम टैक्स रिटर्न भरना जरूरी है. अगले साल कैपिटल गेन होने पर घाटे को फायदे से एडजस्ट करके टैक्स छूट में फायदा लिया जा सकता है.

बिजनेस या कॉन्ट्रैक्ट के लिए जरूरी है ITR

अगर आप बिजनेस शुरू करना चाहते हैं तो भी इनकम टैक्स रिटर्न बहुत जरूरी है. किसी डिपार्टमेंट से कॉन्ट्रैक्ट हासिल करने के लिए ITR काम आएगा. किसी सरकारी विभाग में कॉन्ट्रैक्ट लेने के लिए भी पिछले 5 साल का टैक्स रिटर्न दिखाना जरूरी होता है.

होम लोन या किसी भी लोन के लिए जरूरी है ITR

लोन लेते वक्त भी आपकी इनकम का प्रूफ देखा जाता है. होम लोन की स्थिति में बतौर इनकम प्रूफ 3 साल का ITR मांगा जाता है. बिना ITR के लोन के लिए आवेदन करने पर बैंक इनकार भी कर सकते हैं. नियमित तौर पर ITR फाइल करते हैं तो लोन मिलने के चांस बढ़ जाते हैं. 

टैक्स रिफंड चाहिए तो भरें ITR

नौकरीपेशा का इनकम स्लैब टैक्स के दायरे में नहीं आता, फिर भी किसी वजह से TDS कटता है तो रिटर्न भरकर ही रिफंड ले सकते हैं. टैक्स रिफंड क्लेम करने के लिए ITR फाइल करना होगा. ITR फाइल होने के बाद इनकम टैक्स डिपार्टमेंट उसका असेसमेंट करता है. अगर रिफंड बन रहा है तो उसे प्रोसेस कर दिया जाता है.